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Dr. Deepak Acharya
:: Spiritual path
With regard to the quest for spirituality, it can be said that there are
various spiritual paths which can be followed, and therefore no objective
truth or absolute by which to decide which path is better. Because every
person is different, the choice can be left to the individual's own
sensitivity and understanding. |
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पूर्वज़ों की याद में आकार ले रहा है हरित राजस्थान का पैगाम
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बांसवाड़ा.......आदिवासी इलाकों में हरियाली लौटाने के लिए चल रही विभिन्न योजनाओं के बीच क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमियों की पहल पर एक ऎसा अभियान शुरू हुआ है जिसमें पुरखों से लेकर भावी पीढ़ियों तक के कल्याण की श्रृंखला संजोयी गई है।
बागीदौरा में पर्यावरण प्रेमियों के समूह वृक्ष मित्र मण्डल ने आम आदिवासियों को पौधारोपण से जोड़ने के लिए अनूठा अभियान चलाया। इसमें पूर्वजों के नाम पर धार्मि......
Wednesday 02 Jun, 2010 04:19 AM
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ग्राम्यांचलों का रंग-रूप निखार रही है महानरेगा
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राजस्थान के जनजाति क्षेत्रों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना(महानरेगा) अभावों से घिरे लोगों को राहत और जीवन निर्वाह की रोशनी का अहसास करा रही है। इसके साथ ही ग्राम्य विकास की बुनियाद को नई मजबूती मिल रही है। आहत को राहत और आंचलिक विकास को सार्थक करने वाली यह ऎतिहासिक योजना जरूरतमन्दों के लिए राहत की भगीरथी के रूप में निरन्तर प्रवाहित हो रही है।
खासकर अस......
Thursday 27 May, 2010 07:31 PM
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महानरेगा की बदौलत असिंचित क्षेत्रों के बाशिन्दों को मिला पानी का सुकून
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आदिवासी अंचलों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना न सिर्फ आम जरूरतमन्दों के लिए रोजगार के जरिये सहज जीवनयापन की गारंटी दे रही है बल्कि यह योजना आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी विकास और तरक्की के दीर्घकालीन जनोपयोगी संसाधनों के निर्माण का भी सशक्त माध्यम बनी हुई है।
महानरेगा के अन्तर्गत जनजाति बहुल असिंचित क्षेत्रों में सिंचाई संसाधनों व सुविधाओं के व......
Thursday 27 May, 2010 07:30 PM
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ऎसे बचें लू व तापघात से ?
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मौसम का मिजाज़ तेजी से बदल गया है। झुलसाने वाली प्रचण्ड गर्मी, लू के थपेड़े और बेचैनी के मारे हर कोई परेशाँ हो उठा है। समूचे राजस्थान में इसी तरह के हालात हैं। ऎसे में लोक जीवन को बचाने और जन स्वास्थ्य की रक्षा के कारगर उपायों को आजमाना और इनका व्यापक प्रचार-प्रसार हम सबका फर्ज है।
प्रदेश में इस बार तेज गर्मी का दौर जारी है। तापमान आम वर्षों के मुकाबले बहुत बढ़ गया है। जिस्म को झुलसा द......
Thursday 27 May, 2010 07:23 PM
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महानरेगा में हजारों हाथ बुन रहे हैं हरियाली का ताना-बाना
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- डॉ. दीपक आचार्य
जनजाति अंचलों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना न सिर्फ जरूरतमन्दों के लिए जीवन निर्वाह की भगीरथी साबित हो रही है बल्कि आने वाले कल को सुनहरा बनाने की कोशिशों को भी आकार दे रही है।
मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत की मंशा के अनुरूप राजस्थान को हरीतिमा से भरपूर कर देने वाले हरित राजस्थान कार्यक्रम में महानरेगा की अहम सहभागिता सामने आ रही है......
Wednesday 17 Mar, 2010 10:11 PM
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आनन्द बरसाता है श्रृंगारपरक लाल केशा
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होली पर प्रेम, रति और श्रृंगार गीतों की बरसात के मामले में सीमावर्ती बांसवाड़ा जिला कहीं उन्नीस नहीं है। जिले में होली के मौके पर गाए जाने वाले श्रृंगारपरक काव्य में ‘‘लाल केशा’’ उच्च कोटि का श्रृंगार काव्य है।
जिले में विभिन्न स्थानों पर पुरातन श्रृंगार काव्य ‘लाल केशा’ भी कई युगों से चला आ रहा है। इस पारंपरिक श्रृंगारपरक काव्य को जो भी सुनता है वह रति और कामदेव की आराधना के स्व......
Sunday 28 Feb, 2010 07:44 AM
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फागुन का मजा तो वागड़ में
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यों तो जीवन के अनेकानेक रंग हैं पर फागुन का कहना ही क्या। वसंत के बाद फागुन की चंग पर पड़ती मादक थाप से जीवन की लय और ताल जब वनवासियों के मानस पटल पर उतरती है तो नृत्य की अपनी विशिष्ट उमंग का वातावरण हर ओर छा जाता है।
यह फागुन ही है जो हर तरफ मदमस्त बयारों के साथ मादक उल्लास का ज्वार उमड़ता है। वनवासियों की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान त्योहारों, मेलों, हाट-बाजारों और रहन-सहन के तौर तरीकों ......
Sunday 28 Feb, 2010 07:42 AM
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अनूठे रंगों भरी है आदिवासी क्षेत्रों की होली
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राजस्थान के ठेठ दक्षिणाँचल में मध्यप्रदेश और गुजरात की सरहद से सटे आदिवासी बहुल जिलों बांसवाड़ा और डूंगरपुर में होली निराले अन्दाजों के साथ मनायी जाती हैं। यहां होली एक या दो दिन नहीं, बल्कि पखवाड़े भर तक लोक जीवन के रंगों और वनवासी संस्कृति के रसों का ज्वार उमड़ाती पूरे वेग के साथ बहती है।
गुजरात और मध्यप्रदेश से सटे इस समूचे वनवासी क्षेत्र में होली पर एक से बढ़ कर एक रोचक परम्पराओ......
Sunday 28 Feb, 2010 07:39 AM
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